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अफसरशाही के मकड़जाल में फंसे हैं निवेशक

 उत्तरप्रदेश SPECIAL (DID NEWS ) यूपी में निवेशकों की सहूलियत के लिए सरकार ने ‘रेडकार्पेट’ तो बिछाई है लेकिन अफसरों की लापरवाही से यहां के उद्यमी बेहाल हैं। आला अफसरों के निर्देश, कई दौर की बैठकें और भागदौड़ भी खूब हो रही है लेकिन समाधान निकलने में खासा वक्त लग रहा है। उदाहरण के लिए लखनऊ के एक निवेशक ने जमीन खरीदी। उस पर सरकारी मिल का टीनशेड लगा था। तीन साल तक उस टीन शेड की कीमत तय नहीं हो पाई। मामला जब ऊपर पहुंचा तब जाकर उसका मूल्य 32 लाख रुपये तय हुआ। अभी भी मामला अंजाम तक नहीं पहुंचा है। यह अफसरों की सुस्त रफ्तार का नमूना है।ऐसे कई मामले हैं। जिनमें उद्यमी अपने छोटे-छोटे मामलों को लेकर लंबे समय से इधर से उधर सधान के लिए भटक रहे हैं। उनके आवेदन फाइलों में दबे हैं। फाइलें विभागों के बीच घूम रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हाल ही में मुख्य सचिव आरके तिवारी ने ऐसे ही तमाम मामलों की समीक्षा की तो खुलासा हुआ कि लंबे समय से यह मामले अटके हैं। उन्होंने अब 15 दिन में मामले निपटाने के निर्देश दिए हैं।

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