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मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत 5 राज्यों में एक साथ चुनाव, तथा मतगणना 11 दिसंबर को

चुनाव आयोग ने चार राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम और तेलंगाना में 15 दिसंबर से पहले चुनाव संपन्न होंगे। चुनाव तारीखों का एलान होते ही इन राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ के चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। जबकि बाकी राज्यों में चुनाव एक ही चरण में पूरे होंगे। 15 अक्टूबर से पहले चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि तेलंगाना में चुनाव की तारीखों का ऐलान 12 अक्टूबर के बाद होगा। इन चुनावों में आधुनिक वीवीपैट-एवीएम मशीनों का इस्तेमाल होगा।
कहां-कब होंगे चुनाव
छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को पहले और 20 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान
मध्य प्रदेश और मिजोरम में एक साथ 28 नवंबर को चुनाव
राजस्थान और तेलंगाना में एकसाथ 7 दिसंबर को सभी सीटों पर चुनाव
11 दिसंबर को सभी चार राज्यों के वोटों की गिनती होगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस का वक्त बदलने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि जरूरी तैयारियों के चलते इसमें देरी की गई है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में 231, छत्तीसगढ़ में 90 और राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे। फिलहाल इन तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। वहीं चुनाव आयोग मिजोरम में भी चुनाव तारीखों का एलान कर सकता है। हालांकि, फिलहाल तेलंगाना में चुनाव की तारीखों को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव समय से पहले विधानसभा भंग कर चुके हैं, जिसके बाद वहां भी विधानसभा के निर्धारित कार्यकाल से पहले ही चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। वैसे तेलंगाना में अगले साल चुनाव होने थे।
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें है। हालांकि इनमें से 230 सीटों पर ही चुनाव होते हैं और बाकी सदस्य को नामित किया जाता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 166, कांग्रेस को 57, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थी।
राजस्थान में विधानसभा की कुल 200 सीटें हैं, साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 163 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई। बसपा को 3, एनपीपी को 4, एनयूजेडपी को 2 सीटें मिली थीं। जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे।
छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। 2013 में विधानसभा चुनाव भाजपा को 49, कांग्रेस को 39, बसपा को 1 और अन्य को एक सीट मिली थी। रमन सिंह की अगुवाई में भाजपा ने पिछले चुनाव में लगातार तीसरी बार कांग्रेस को मात देकर सरकार बनाई थी। छत्तीसगढ़ में कुल 27 जिले हैं। राज्य में कुल 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं।
पूर्वोत्तर के मिजोरम में कुल 40 विधानसभा सीटे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में इन 40 सीटों में से कांग्रेस को 34, एमएनएफ को 5 और और एमपीसी को 1 सीट मिली थी। हालांकि इस बार इन तीनों दल के अलावा भाजपा भी मैदान में अपनी किस्मत आजमाएगी।
2014 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 119 सीटों में से केसीआर की पार्टी टीआरएस को 90 सीटें मिली थी।जबकि कांग्रेस को 13, ओवैसी की पार्टी AIMIM को 7, भाजपा को 5, टीडीपी को 3 और सीपीआईएम को 1 सीट मिली थी। इन बार भी इन्हीं पार्टियों के बीच मुकाबला है।
विधानसभा चुनाव का असर 2019 के लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा
गौरतलब है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव काफी अहम है। जाहिर है कि इन चुनावों के नतीजों का सीधा असर 2019 के चुनाव पर पड़ सकता है। अभी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। वहीं मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है।
पांचों राज्यों में कुल 83 लोकसभा सीटें; भाजपा के पास 60, कांग्रेस के पास 9
मध्यप्रदेश : कुल 29 लोकसभा सीटें। इनमें से भाजपा के पास 26 और कांग्रेस के पास 3 सीटें।
छत्तीसगढ़ : कुल 11 सीटें। भाजपा के पास 10, कांग्रेस के पास 1 सीट।
राजस्थान : कुल 25 सीटें। भाजपा के पास 23, कांग्रेस के पास 2 सीटें।
मिजोरम : एक लोकसभा सीट जो कांग्रेस पास।
तेलंगाना : कुल 17 लोकसभा सीटें। टीआरएस के पास 11, भाजपा के पास 1, कांग्रेस के पास 2, तेदेपा के पास 1 और 2 अन्य के पास।

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