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जितिया व्रत को लेकर पंडित-पंचांग एकमत नहीं

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जीमूतवाहन व्रत (जिउतिया) को लेकर पंडित और पंचांग एकमत नहीं हैं। इस वजह से इस बार जिउतिया व्रत दो दिनों का हो गया है। बनारस पंचांग से चलने वाले श्रद्धालु 22 सितंबर को जिउतिया व्रत रखेंगे और 23 सितंबर की सुबह पारण करेंगे।वहीं मिथिला और विश्वविद्यालय पंचांग दरभंगा से चलनेवाले श्रद्धालु 21 सितंबर को व्रत रखेंगे और 22 सितंबर की दोपहर तीन बजे पारण करेंगे। इस तरह बनारस पंचांग के मुताबिक जिउतिया व्रत 24 घंटे का है और विश्विविद्यालय पंचांग से चलन वाले व्रती 33 घंटे का व्रत रखेंगे। वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं जिउतिया का निर्जला व्रत रखती हैं। सनातन धर्मावलंबियों में इस व्रत का खास महत्व है। ज्योतिषाचार्य मार्कण्डेय शारदेय के मुताबिक प्राय: जितिया का व्रत दो दिन हो ही जाता है। एक मत चन्द्रोदयव्यापिनी अष्टमी का पक्षधर है तो दूसरा सूर्योदयव्यापिनी अष्टमी का। सूर्योदय से सूर्योदय तक 24 घंटे का ही कोई व्रत होता है,अत: वैसा ही आचरण करना चाहिए। 21 सितम्बर शनिवार को अष्टमी अपराह्न 3.43 से प्रारम्भ है और 22 सितम्बर,रविवार को अपराह्न 2.49 तक है। मेरा मत सूर्योदयव्यापिनी अष्टमी के पक्ष में है। जब सूर्योदय से हम अष्टमी का ग्रहण करते हैं तो उसके पहले जैसे सरगही करते हैं,कर सकते हैं। अगले दिन 23 सितम्बर ,सोमवार को नवमी 1.30 बजे दिन तक है। ऐसे में पारण का भी कोई व्यवधान नहीं है। अष्टमी का व्रत नवमी में पारण,सूर्योदय से व्रत प्रारम्भ और अगले सूर्योदय के बाद पारण।




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