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अफगानिस्‍तान की भूलभुलैया है पंजशीर

अफगानिस्‍तान की पंजशीर घाटी देश का वो क्षेत्र है जिस पर अब तक तालिबान का कब्‍जा नहीं हुआ है। इसकी वजह है यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, जिसने इसको अब तक जटिल और अभेद्य बनाया हुआ है। इस पर कब्‍जे को लेकर अब जहां तालिबान ने कमर कस ली है वहीं पंजशीर भी इससे मुकाबले को पूरी तरह से तैयार है। यह बेहद दुर्गम क्षेत्र है। इसकी वजह से इसको यहां की भूलभुलैया कहा जाता है। आपको बता दें कि पंजशीर काबुल से म‍हज 125 किमी की दूरी पर स्थित है। पंजशीर ऊंचे और नीचे पहाड़ों से घिरी एक घाटी है। यहां के दुर्गम और भूलभुलैया वाले रास्‍तों पर किसी बाहरी का गुम हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है।

यहां पर आना और निकलना दोनों ही काफी मुश्किल है। तालिबान ही नहीं अमेरिका भी यहांं तक नहीं पहुंच सका। पंजशीर इस वक्‍त तालिबान के खिलाफ मोर्चाबंदी के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका है। यहांं पर नार्दर्न एलाइंस मुकाबले को तैयार है। उसका साथ देश के पूर्व राष्‍ट्रपति अमरुल्‍लाह सालेह की फौज दे रही है।पंजशीर केवल तालिबान के खिलाफ ही नहीं उठ खड़ी हुई है बल्कि इससे पहले यहां पर रूस और का भी जबरदस्‍त विरोध हुआ था। रूस को बाहर निकालने में पंजशीर और नार्दर्न एलाइंस की अहम भूमिका रही है। नार्दर्न एलाइंस के नेता अहमद मसूद का ये गढ़ है। कभी उनके पिता अहमद शाह मसूद ने इसी इलाके से रूस के खिलाफ जंग का ऐलान किया था और उन्‍हें वापस जाने पर विवश किया था। मसूद देश के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं।