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वैवाहिक सुख देने वाले शुक्र 28 सितंबर को करेंगे राशि परिवर्तन

वैवाहिक सुख देने वाले शुक्र 28 सितंबर को करेंगे राशि परिवर्तन

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धर्म (DID NEWS) : शुक्र देव 28 सितंबर 2020 को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और 23 अक्टूबर तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद शुक्र ग्रह का गोचर कन्या राशि में होगा। शुक्र को सभी ग्रहों में सबसे चमकदार ग्रह माना जाता है। चूंकि शुक्र एक शुभ ग्रह है इसलिए कुंडली में इसकी अच्छी स्थिति से जातकों को जीवन में कई सुख सुविधाएँ मिलती हैं लेकिन मुख्य रुप से प्रेम, भौतिक सुखों में इसकी मजबूती से वृद्धि होती है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में भी शुक्र की स्थिति का असर पड़ता है, यदि कुंडली में शुक्र अच्छी स्थिति में है तो दांपत्य जीवन सुखद रहता है। वहीं शुक्र की दुर्बल स्थिति व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को खराब कर सकती है।  ...
पुरूषोत्तम मास के दूसरे शनिवार को इस तरह करें पूजा

पुरूषोत्तम मास के दूसरे शनिवार को इस तरह करें पूजा

धर्म
धर्म ( DID NEWS): 18 सितम्बर से अधिक मास प्रारंभ हो गया है। अधिकमास को मल मास या पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह अधिकमास भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस बार के अधिक मास में विशेष संयोग बन रहें है जो 165 वर्ष बाद बन रहें है। इसमें भगवान श्री विष्णु के साथ ही अन्य देवताओं की भी पूजा कर उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होने लगती है। अधिकमास का समापन 16 अक्टूबर को होगा। इस दौरान भगवान विष्णु की अनेक रूप में पूजा करनी चाहिए जिससे विशेष फल मिलता है। मल मास का दूसरा शनिवार 26 सितम्बर को आ रहा है। इस दिन भगवान शनि की पूजा करना बहुत ही शुभ माना गया है। हम आपको अधिकमास के शनिवार को शनि देव की किस तरह पूजा करनी चाहिए। इस बारे में बताने जा रहे हैं। अधिकमास में शनिवार का दिन अहम माना गया है। इस दिन शनि की पूजा करने से अनेक प्रकार के लाभ मिलते है...
भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में होती है उन्नति

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में होती है उन्नति

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धर्म (DID NEWS): आज विश्वकर्मा जंयती है, विश्वकर्मा भगवान ने सोने की लंका तथा द्वारका जैसे प्राचीन नगरों का निर्माण किया था। प्राचीन नगरों के साथ देवताओं के लिए हथियार भी बनाए, तो आइए हम आपको विश्वकर्मा जयंती का महत्व तथा पूजा विधि के बारे में बताते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्वमान्य देव शिल्पी विश्वकर्मा अपने विशेष प्रकार के ज्ञान के देवता तुल्य माने जाते हैं और उन्हें पूजा जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा के पूजन के बिना कोई भी तकनीकी काम शुभ नहीं माना जाता है। विश्वकर्मा जयंती हर साल आश्विन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनायी जाती है। हर साल 17 सितंबर को तकनीकी ज्ञान के रचनाकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। लेकिन इस साल 16 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनायी जाएगी। ऐसा माना जाता है भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नही...
इंदिरा एकादशी व्रत

इंदिरा एकादशी व्रत

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धर्म (DID NEWS): हिन्दू मान्यताओं में एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। आश्विन महीने में कृष्ण पक्ष के दिन आने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी की विशेष मान्यता प्राप्त है क्योंकि यह एकादशी पितृ पक्ष में पड़ रही है। इंदिरा एकादशी को मोक्षदायिनी एकादशी कहा गया है। कथा के अनुसार प्राचीनकाल में महिष्मति नगर में इंद्रसेन नाम का एक राजा शासन करता था। वह राजा विष्णु का परम भक्त था। एक दिन जब राजा अपनी सभा में बैठा था तो महर्षि नारद उसकी सभा में आए। मुनि ने राजा से कहा कि आपके सभी अंग कुशल तो है न और आप विष्णु की भक्ति करते हैं न ? यह सब सुनकर राजा ने कहा कि सब ठीक है। मैं यमलोक में तुम्हारे पिता को यमराज के निकट सोते देखा उऩ्होंने संदेश दिया कि मेरे पुत्र को एकादशी का व्रत करने को कहना। यह सुनकर राजा व्यग्र हो गए और नारद से बोले कि आप मुझे व्रत की विधि...
शिव चालीसा का पाठ करने से दूर होती हैं जीवन की सभी परेशानियां

शिव चालीसा का पाठ करने से दूर होती हैं जीवन की सभी परेशानियां

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धर्म (DID NEWS): शिव चालीसा का पाठ करने से डर या भर से भी छुटकारा मिलता है। इसके लिए जय गणेश गिरीजा सुवन'' मंगल मूल सुजान, कहते अयोध्या दास तुम'' देउ अभय वरदान वाली लाइन पढ़ें। इस पंक्ति को शाम के समय नहीं बल्कि सुबह पढ़ें। इस प्रकार 40 दिन तक लगातार पढ़ें आपको लाभ मिलेगा। हिन्दू धर्म में शिव चालीसा का खास महत्व है। शिव जी को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल उपाय है, तो आइए हम आपको शिव चालीसा की महिमा के बारे में बताते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के ज्योतिषविद् एवं कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हिन्दू धर्म में भक्त सरल भाषा में जो भगवान की प्रार्थना करता है उसे चालीसा कहते हैं। शिव चालीसा का चालीसा कहने के पीछे एक कारण यह भी है कि इसमें चालीस पंक्तियां हैं। इस प्रकार लोकप्रिय शिव चालीसा का पाठ कर भक्त बहुत आसानी से अपने भगवान को प्रसन्न कर लेते हैं। शिव चालीसा के द्...
कीमती चीजों की बात तो दूर है, एक तिनके का भी लालच करना पाप को बढ़ाता है

कीमती चीजों की बात तो दूर है, एक तिनके का भी लालच करना पाप को बढ़ाता है

धर्म
धर्म (DID NEWS): जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व वैशाली राज्य के कुंडलपुर में इक्ष्वाकु वंश के राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर हुआ था। उनका प्रारंभिक नाम वर्धमान था। वर्धमान ने 30 वर्ष की आयु में सबकुछ त्यागकर संन्यास धारण कर लिया था। इसके बाद 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। महावीर स्वामी के शिष्यों में राजा बिंबिसार भी शामिल थे।  ...
परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज को हुआ कोरोना

परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज को हुआ कोरोना

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धर्म (DID NEWS): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से संक्रमित मिर्जापुर के शक्तेशगढ़ आश्रम के स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का शुक्रवार को फोन पर हाल चाल जाना। स्वामी अड़गड़ानंद को कोविड-19 का पता चलने के बाद वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आश्रम से जुड़े रामप्रसाद पांडेय बाबा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी अड़गड़ानंद को फोन कर उनका हाल चाल लिया।  ...
पितृ पक्ष

पितृ पक्ष

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धर्म (DID News): भाद्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि से हर साल पितृ पक्ष का आरंभ होता है। इस वर्ष भी पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) 2 सितंबर से शुरू हो रहा है। पूर्णिमा श्राद्ध 2 सितंबर को होगा लेकिन पितृपक्ष के सभी श्राद्ध 3 सितंबर से ही आरंभ होंगे जो 17 सितंबर विसर्जन तक चलेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। यहां श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है। हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने से है। सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता...
‘सिद्धिविनायक मंदिर’ की महिमा

‘सिद्धिविनायक मंदिर’ की महिमा

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धर्म (DID NEWS): देश के सबसे अमीर मंदिरों में अपना स्थान रखने वाले बप्पा का सबसे प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में स्थित है।आप इस मंदिर की महिमा और प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि बप्पा के दर्शन के लिए इस मंदिर के बाहर घंटों लाइन लगा कर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इस मंदिर की खूबसूरती अलौकिक है और इसकी बनावट भी आप का मन मोह लेती है। मंदिर के अंदर भगवान गणेश सिद्धिविनायक के रूप में विराजमान हैं तथा उनके अगल-बगल उनकी दोनों पत्नियां रिद्धि-सिद्धि की मूर्ति भी लगी हुई है। वहीं इस मंदिर की गर्भ गृह की छतें सोने की परतों से जड़ित हैं। मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 1801 ई. में बिट्ठू और देऊ बाई पाटिल ने मिलकर कराया था। कहा जाता है कि बिट्ठू एक ठेकेदार था जो गणपति भगवान के मंदिर का निर्माण कराना चाहता था। वहीं उस इलाके में एक कृषक महिला देऊ बाई पाटिल थीं, जो भगवान गणेश के...
चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता के प्रतीक हैं भगवान गणेश

चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता के प्रतीक हैं भगवान गणेश

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धर्म ( DID NEWS): प्रथम पूज्य शिव और पार्वती के पुत्र, गणों के स्वामी, गज जैसा सिर, मूषक सवारी, केतु के देवता, चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता के प्रतीक उनकी चार भुजाएं, महाबुद्धित्व का प्रतीक लंबी सूंड, विघ्न हरण मंगल करण एवं 108 नामों से पुकारे जाने वाले गणपति अर्थात गणेश भगवान का पूजन विश्वव्यापी हैं। भारत में ही नहीं वरण दुनिया के अनेक देशों में पूजे जाते हैं विनायक। भारत में गणेश जी के अनेक मंदिर न केवल प्रसिद्ध हैं वरण उनके प्रति प्रगाढ़ आस्था, श्रद्धा और विश्वास का भी प्रतीक हैं। कोई घर, गली, मोहल्ला, भवन, शहर ऐसा नहीं जहाँ गणेश जी विराजित न हों। उनका पूजन न होता हो। सृष्टि और संस्कृति में आदि काल से सर्व प्रथम पूजे जाते हैं। गणपति के आस्था धामों पर मेले जुड़ते हैं, भव्य शोभा यात्राएं आयोजित की जारी है। गणेश चतुर्थी पर इनकी स्थापना एवं अनन्त चतुर्थी को विसर्जन शुभ फलदायक माना जाता ...