Saturday, November 28Welcome Guest !

धर्म

रमा एकदशी

रमा एकदशी

धर्म
धर्म (DID NEWS): कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकदशी कहा जाता है। माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है, इसलिए इस एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी पर माता लक्ष्मी की पूजा के साथ ही दीपावली उत्सव का आरंभ हो जाता है। मां लक्ष्मी को समर्पित इस व्रत को सुख और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप दूर हो जाते हैं। सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा बनी रहती है। इस एकादशी पर मां महालक्ष्मी के रमा स्वरूप के साथ भगवान विष्णु के पूर्णावतार केशव स्वरूप के पूजन का विधान है। पूजन में भगवान विष्णु को धूप, तुलसी के पत्ते, दीप, नैवेद्य, फूल और फल आदि अर्पित करें। मां लक्ष्मी की पूजा में लाल पुष्प अर्पित करें। रमा एकादशी व्रत में प्रात: काल भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण की ...
संतान के कष्ट हरता है अहोई अष्टमी व्रत

संतान के कष्ट हरता है अहोई अष्टमी व्रत

धर्म
धर्म (DID News): भारत में हिन्दू समुदाय में करवा चौथ के चार दिन पश्चात् और दीवाली से ठीक एक सप्ताह पहले एक प्रमुख त्यौहार ‘अहोई अष्टमी’ मनाया जाता है, जो प्रायः वही स्त्रियां करती हैं, जिनके संतान होती है किन्तु अब यह व्रत निसंतान महिलाएं भी संतान की कामना के लिए करती हैं। ‘अहोई अष्टमी’ व्रत प्रतिवर्ष कार्तिक कृष्ण अष्टमी को किया जाता है। स्त्रियां दिनभर व्रत रखती हैं। सायंकाल से दीवार पर आठ कोष्ठक की पुतली लिखी जाती है। उसी के पास सेई और सेई के बच्चों के चित्र भी बनाए जाते हैं। पृथ्वी पर चौक पूरकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश के पूजन के बाद दीवार पर लिखी अष्टमी का पूजन किया जाता है। फिर दूध-भात का भोग लगाकर कथा कही जाती है। आधुनिक युग में अब बहुत सी महिलाएं दीवारों पर चित्र बनाने के लिए बाजार से अहोई अष्टमी के रेडीमेड चित्र खरीदकर उन्हें पूजास्थल पर स्थापित कर उनका पूजन करती हैं। ...
शिव भक्त हैं तो जरूर दर्शन करें लखनऊ शहर के प्रसिद्ध शिवालयों के

शिव भक्त हैं तो जरूर दर्शन करें लखनऊ शहर के प्रसिद्ध शिवालयों के

धर्म
धर्म ( DID NEWS) : भगवान शिव के विषय में यह बात प्रचलित है कि वो बहुत जल्दी अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष आयोजन की जरुरत भी नहीं पड़ती है। कोई सच्चा भक्त अगर सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना ही कर ले तो उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि हर शहर में, गाँव में छोटा-बड़ा शिवालय आपको मिल ही जायेगा।  ...
वास्तु टिप्स का पालन करके सौभाग्य बुलाएं अपने घर

वास्तु टिप्स का पालन करके सौभाग्य बुलाएं अपने घर

धर्म
धर्म (DID NEWS): कई बार ऐसा होता है कि जीवन के कई क्षेत्रों में लगातार मेहनत करने के बावजूद हमें मनोवांछित सफलता नहीं मिलती है। लेकिन इसमें उदास और परेशान होने की जरूरत नहीं है। वास्तु शास्त्र में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं, जिनका पालन करते हुए अगर हम अपने जीवन के कार्य करते हैं, तो सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही वास्तु टिप्स के बारे में बताएंगे, जो बेहद आसान होने के साथ ही काफी प्रभावी भी माने गए हैं। वास्तु के अनुसार, कभी भी घर में दो बार झाड़ू लगाने से बचना चाहिए। वास्तु कहता है कि एक बार के झाड़ू से ही घर की सभी नकारात्मक एनर्जी बाहर निकल जाती है। वहीं जब हम दूसरी बार झाड़ू लगाते हैं तो सकारात्मक एनर्जी भी बाहर निकल जाती है। इसीलिए घर में दो बार झाड़ू लगाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही झाड़ू को कभी भी खड़ा करके नहीं रखें और इसे हमेशा लिटा कर रखें। कोशिश कर...
‘शिरगुल महाराज’ जहां जल चढ़ाने से होती हैं सारी मनोकामनाएं पूर्ण

‘शिरगुल महाराज’ जहां जल चढ़ाने से होती हैं सारी मनोकामनाएं पूर्ण

धर्म
धर्म ( DID NEWS) : हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में सबसे ऊंची चोटी चूड़धार है, जहां शिरगुल महाराज का मंदिर बना हुआ है। मंदिर में स्थापित भगवान शिव को सिरमौर और चौपाल का देवता के रूप में स्थानीय लोग जानते हैं। इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों के अंदर बेहद अटूट श्रद्धा है और ऐसा कहा जाता है कि 'शिरगुल महाराज' के समक्ष अपनी समस्याओं को बताने से उनका निदान भी मिलता है। ऐसे ही कई दिलचस्प किस्से जुड़े हुए हैं इस मंदिर को लेकर। आईये जानते हैं...  ...
दिवाली बाद देवगुरु बृहस्पति करेंगे राशि परिवर्तन

दिवाली बाद देवगुरु बृहस्पति करेंगे राशि परिवर्तन

धर्म
 धर्म (DID NEWS) दिवाली से पहले जहां कई ग्रह राशि परिवर्तन कर रहे हैं, वहीं दिवाली के बाद देवगुरु बृहस्पति राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 20 नवंबर को ये मकर राशि में प्रवेश करेंगे। दिवाली बाद होने वाला यह ग्रह परिवर्तन अच्छा संयोग लेकर आ रहा है। इस साल के अंत कर गुरु मकर राशि में ही रहेंगे।खासकर गुरु के राशि परिवर्तन से मेष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोगों के लिए बहुत ही उत्तम योग बन रहे हैं।इन राशि वालों के लिए साल के अंत तक शुभ समाचार तो प्राप्त होंगे ही साथ ही भूमि वाहन और नौकरी में तरक्की के योग भी बन रहे हैं। आपको बता दें कि गुरु को  धन, सुख संपत्ति का कारक माना जाता है। आपको बता दें कि इससे पहले  बृहस्पति 13 सिंतबर से धुन राशि में मार्गी हुए थे।...
प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलने वाले नौ शक्तियों का मिलन पर्व है नवरात्रि

प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलने वाले नौ शक्तियों का मिलन पर्व है नवरात्रि

धर्म
धर्म (DID NEWS): भारतीय समाज और विशेषकर हिन्दू समुदाय में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है, जो आदि शक्ति दुर्गा की पूजा का पावन पर्व है। नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित हैं और इसीलिए नवरात्रि को नौ शक्तियों के मिलन का पर्व भी कहा जाता है। प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलने वाले नवरात्र नवशक्तियों से युक्त हैं और हर शक्ति का अपना-अपना अलग महत्व है। नवरात्र के पहले स्वरूप में मां दुर्गा पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में विराजमान हैं। नंदी नामक वृषभ पर सवार शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। इन्हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक माना जाता है। दुर्गम स्थलों पर स्थित बस्तियों में सबसे पहले शैलपुत्री के मंदिर की स्थापना इसीलिए की जाती ह...
वैवाहिक सुख देने वाले शुक्र 28 सितंबर को करेंगे राशि परिवर्तन

वैवाहिक सुख देने वाले शुक्र 28 सितंबर को करेंगे राशि परिवर्तन

धर्म
धर्म (DID NEWS) : शुक्र देव 28 सितंबर 2020 को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और 23 अक्टूबर तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद शुक्र ग्रह का गोचर कन्या राशि में होगा। शुक्र को सभी ग्रहों में सबसे चमकदार ग्रह माना जाता है। चूंकि शुक्र एक शुभ ग्रह है इसलिए कुंडली में इसकी अच्छी स्थिति से जातकों को जीवन में कई सुख सुविधाएँ मिलती हैं लेकिन मुख्य रुप से प्रेम, भौतिक सुखों में इसकी मजबूती से वृद्धि होती है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में भी शुक्र की स्थिति का असर पड़ता है, यदि कुंडली में शुक्र अच्छी स्थिति में है तो दांपत्य जीवन सुखद रहता है। वहीं शुक्र की दुर्बल स्थिति व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को खराब कर सकती है।  ...
पुरूषोत्तम मास के दूसरे शनिवार को इस तरह करें पूजा

पुरूषोत्तम मास के दूसरे शनिवार को इस तरह करें पूजा

धर्म
धर्म ( DID NEWS): 18 सितम्बर से अधिक मास प्रारंभ हो गया है। अधिकमास को मल मास या पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह अधिकमास भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस बार के अधिक मास में विशेष संयोग बन रहें है जो 165 वर्ष बाद बन रहें है। इसमें भगवान श्री विष्णु के साथ ही अन्य देवताओं की भी पूजा कर उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होने लगती है। अधिकमास का समापन 16 अक्टूबर को होगा। इस दौरान भगवान विष्णु की अनेक रूप में पूजा करनी चाहिए जिससे विशेष फल मिलता है। मल मास का दूसरा शनिवार 26 सितम्बर को आ रहा है। इस दिन भगवान शनि की पूजा करना बहुत ही शुभ माना गया है। हम आपको अधिकमास के शनिवार को शनि देव की किस तरह पूजा करनी चाहिए। इस बारे में बताने जा रहे हैं। अधिकमास में शनिवार का दिन अहम माना गया है। इस दिन शनि की पूजा करने से अनेक प्रकार के लाभ मिलते है...
भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में होती है उन्नति

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में होती है उन्नति

धर्म
धर्म (DID NEWS): आज विश्वकर्मा जंयती है, विश्वकर्मा भगवान ने सोने की लंका तथा द्वारका जैसे प्राचीन नगरों का निर्माण किया था। प्राचीन नगरों के साथ देवताओं के लिए हथियार भी बनाए, तो आइए हम आपको विश्वकर्मा जयंती का महत्व तथा पूजा विधि के बारे में बताते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्वमान्य देव शिल्पी विश्वकर्मा अपने विशेष प्रकार के ज्ञान के देवता तुल्य माने जाते हैं और उन्हें पूजा जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा के पूजन के बिना कोई भी तकनीकी काम शुभ नहीं माना जाता है। विश्वकर्मा जयंती हर साल आश्विन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनायी जाती है। हर साल 17 सितंबर को तकनीकी ज्ञान के रचनाकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। लेकिन इस साल 16 सितम्बर को विश्वकर्मा जयंती मनायी जाएगी। ऐसा माना जाता है भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नही...