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रमा एकदशी

कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकदशी कहा जाता है। माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है, इसलिए इस एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी पर माता लक्ष्मी की पूजा के साथ ही दीपावली उत्सव का आरंभ हो जाता है। मां लक्ष्मी को समर्पित इस व्रत को सुख और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप दूर हो जाते हैं। सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

इस व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा बनी रहती है। इस एकादशी पर मां महालक्ष्मी के रमा स्वरूप के साथ भगवान विष्णु के पूर्णावतार केशव स्वरूप के पूजन का विधान है। पूजन में भगवान विष्णु को धूप, तुलसी के पत्ते, दीप, नैवेद्य, फूल और फल आदि अर्पित करें। मां लक्ष्मी की पूजा में लाल पुष्प अर्पित करें। रमा एकादशी व्रत में प्रात: काल भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण की विधि विधान से उपासना करें।

इस दिन तुलसी पूजन करना शुभ माना जाता है। रात्रि में चंद्रोदय के पश्चात दीपदान करें। रात्रि में भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी का भजन-कीर्तन करें। इस एकादशी के व्रत और पूजन से मां लक्ष्मी के साथ भगवान श्री हरि विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत बहुत ही फलदायी है। इस व्रत में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें। कांसे के बर्तन में भोजन न करें। इस दिन चावल और उससे बने पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस व्रत में झूठ और निंदा से दूर रहें। द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में कभी भी धन का अभाव नहीं होता है।