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पुरूषोत्तम मास के दूसरे शनिवार को इस तरह करें पूजा

धर्म ( DID NEWS): 18 सितम्बर से अधिक मास प्रारंभ हो गया है। अधिकमास को मल मास या पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह अधिकमास भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस बार के अधिक मास में विशेष संयोग बन रहें है जो 165 वर्ष बाद बन रहें है। इसमें भगवान श्री विष्णु के साथ ही अन्य देवताओं की भी पूजा कर उन्हें प्रसन्न करना चाहिए।

ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होने लगती है। अधिकमास का समापन 16 अक्टूबर को होगा। इस दौरान भगवान विष्णु की अनेक रूप में पूजा करनी चाहिए जिससे विशेष फल मिलता है। मल मास का दूसरा शनिवार 26 सितम्बर को आ रहा है। इस दिन भगवान शनि की पूजा करना बहुत ही शुभ माना गया है। हम आपको अधिकमास के शनिवार को शनि देव की किस तरह पूजा करनी चाहिए। इस बारे में बताने जा रहे हैं।

अधिकमास में शनिवार का दिन अहम माना गया है। इस दिन शनि की पूजा करने से अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। शास्त्रों के अनुसार अधिकमास के शनिवार को रूद्राभिषेक करना बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। अगर आपको नवग्रहों के द्वारा अशुभ फल प्राप्त हो रहा है तो आपको अधिकमास के शनिवार को उनकी विशेष पूजा करनी चाहिए। अगर आपको शनि की ढैय्या अथवा साढ़ेसाती है तो आपको शनिवार के दिन रूद्राभिषेक करना चाहिए।

ऐसा करने से आपके जीवन में किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं रहेगी। साथ ही आपका गृहस्थ जीवन भी शांति के साथ बीतेगा। अधिकमास में जिस तरह भगवान विष्णु की पूजा को काफी महत्वपूर्ण मानी गई है उसी प्रकार अधिकमास के हर शनिवार को शनि देव की पूजा करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार का दिन शनि देव का रहता है और वे अधिकमास में की गई पूजा से आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

 

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