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आखिर वोट बटोरने के लिए मुफ्त बिजली का यह शिगूफा राज्य को किस ओर ले जाएगा

बादल साहब अब हमें कोई नहीं हरा सकता!’ ये शब्द बलराम जी दास टंडन ने 1997 में कहे थे। तब पंजाब में शिरोमणि अकाली दल एवं भाजपा गठबंधन की सरकार थी। कैबिनेट की बैठक में जब किसानों को मुफ्त बिजली देने का फैसला हुआ तो वरिष्ठ मंत्री टंडन ने यह भी कहा था, ‘आपने गांवों के लोगों को अपने हक में कर लिया है, बाकी शहरी इलाकों में हम देख लेंगे।’ लेकिन अगले ही साल यानी 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में गठबंधन एक भी सीट नहीं ले सका। मंथन हुआ कि आखिर मुफ्त बिजली देकर भी क्या हुआ? फिर टंडन ने ही प्रस्ताव रखा कि यह सब्सिडी बंद कर दी जाए, पर ऐसा करना तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के लिए आसान नहीं था। 2002 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की फिर हार हुई।

आज पंजाब में मुफ्त बिजली के साथ ही बिजली का संकट फिर सियासी मुद्दा है। मुफ्त बिजली के उजाले के पीछे का अंधेरा अब भी कायम है और सियासी फायदे के लिए उसे कोई देखना नहीं चाहता। अभी तक पंजाब में किसानों के अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए बिजली मुफ्त है और छोटे उद्योगों के लिए पांच रुपये प्रति यूनिट। कांग्रेस सरकार ने 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी लोगों को दो सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का अपना वादा पूरा करने की कवायद शुरू ही की थी कि आम आदमी पार्टी ने भी अपनी सरकार बनने पर तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा कर दिया।सवाल यह उठता है कि आखिर वोट बटोरने के लिए मुफ्त बिजली का यह शिगूफा राज्य को किस ओर ले जाएगा? राज्य में 1997 में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से शुरू हुई सब्सिडी अब साढ़े दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। इस वित्त वर्ष में बिजली सब्सिडी के 17,800 करोड़ रुपये पंजाब सरकार पर बकाया हैं, जो उसे पावरकॉम को देने हैं। अब अगर दो सौ यूनिट सभी को मुफ्त देने की योजना लागू होती है तो सरकारी खजाने पर 7,768 करोड़ रुपये सब्सिडी का बोझ और पड़ने वाला है। निश्चित तौर पर इससे माली हालत और बिगड़ेगी। पहले ही पंजाब 2.73 लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबा हुआ है। एक सच्चाई यह भी है कि पंजाब में दी जा रही इस सब्सिडी का चालीस फीसद हिस्सा बिजली बिलों पर विभिन्न शुल्कों के रूप में उन लोगों से ही वसूला जा रहा है, जो सब्सिडी के दायरे में नहीं आते। यानी घरेलू उपभोक्ता एवं दुकानदार। कोई भी पार्टी यह शुल्क लगाने का विरोध नहीं करती। यही नहीं, पंजाब में आम जनता के लिए बिजली पड़ोसी राज्यों से कहीं महंगी है।