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दीपावली दिनचर्या इस शुभ दिन सुबह से रात तक क्या करें

दिवाली के दिन आधी रात को महालक्ष्मी सद्ग्रहस्थों के घरों में घूमने आती हैं. इस दिन घर-बाहर हर जगह साफाई कर के सजाया-संवारा जाता है. ब्रह्मपुराण अनुसार  दिवाली मनाने से लक्ष्मीजी खुश होकर ऐसे घरों में स्थायी रूप से वास करने लगती हैं. इस क्रम में दीपावली, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाईदूज-इन पांच पर्वों का का ऐसा मिलन है, जो हमेशा ही मंगलकारी है. ऐसे में सबसे मंगल पर्व दिवाली के दिन सुबह से रात तक कुछ ऐसे काम करने चाहिए, जिनसे महालक्ष्मी का घर में स्थायी निवास बने. जानिए मां लक्ष्मी की कृपा पाने के  प्रमुख तरीके.

 

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और निम्न संकल्प से उपवास रखें.

 

मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं
गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये

 

2. दोपहर में स्वादिष्ट पकवान बनाएं और घर सजाएं. बड़ों की सेवा कर आशीर्वाद लें.
3. शाम को दोबारा नहाकर लक्ष्मीजी के स्वागत की तैयारी के लिए दीवार को चूने गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं. कागज का चित्र भी लगा सकते हैं.
4. भोजन में कदली फल, पापड़ और कई प्रकार की मिठाइयां बनाएं.
5. लक्ष्मीजी के चित्र के सामने चौकी पर मौली बांधें, गणेशजी की मूर्ति रखें.
6. चौकी पर छह चौमुखे और 26 छोटे दीपक रखें, इनमें तेल-बत्ती डाल जलाएं.
7. जल, मौली, चावल, फल, गुड़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें.

 

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥

निम्न मंत्र से इंद्र का ध्यान करें
ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः।
शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥

निम्न मंत्र से कुबेर का ध्यान करें
धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।
भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥

09. तिजोरी में मूर्ति रखकर पूजा करें. घर की बहू-बेटियों को रुपए दें
10. लक्ष्मी पूजन रात बारह बजे पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश रखें.
11. पास ही सौ रुपए, सवा सेर चावल, गुड़, चार केले, मूली, हरी ग्वार फली और पांच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें.
12. दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आंखों में लगाएं, फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें.
13. रात बारह बजे दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल और छाज (सूप) पर तिलक करें.
14. दूसरे दिन सुबह चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा फेंकने के लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’ .