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संकष्टी चतुर्थी व्रत कल, बन रहे हैं ये दो शुभ योग

धर्म ( DID NEWS) : विकट संकष्टी चतुर्थी 30 अप्रैल शुक्रवार के दिन है। इस दिन गणपति महाराज की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का आशय संकट को रहने वाली चतुर्थी तिथि से है। आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व।

संकष्टी चतुर्थी पर शुभ योग
पंचांग के अनुसार इस बार संकष्टी चतुर्थी पर शिव और परिघ योग रहेगा। ये दोनों ही योग बहुत शुभ माने जाते हैं। 30 अप्रैल सुबह 08 बजकर 03 मिनट तक परिघ योग रहेगा। इसके बाद से शिव योग आरंभ हो जाएगा। यदि कोई शत्रु से संबंधित मामला हो तो परिध योग में विजय प्राप्ति होती है। शिव बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है।

  • संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
    सबसे पहले सुबह उठें और स्नान करें।
    इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए।
    पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
    स्वच्छ आसन या चौकी पर भगवान को विराजित करें।
    भगवान की प्रतिमा या चित्र के आगे धूप-दीप प्रज्जवलित करें।
    ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का जाप करें।
    पूजा के बाद भगवान को लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं।
    शाम को व्रत कथा पढ़कर चांद देखकर अपना व्रत खोलें।
    अपना व्रत पूरा करने के बाद दान करें।

संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि संकष्टी के दिन गणपति की पूजा-आराधना करने से समस्त प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है। वे अपने भक्तों की सारी विपदाओं को दूर करते हैं और उनकी मनोकामनाएं को पूर्ण करते हैं। चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है।