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पहली दो तिमाही में अक्षय कुमार की बेलबॉटम बनी हाइएस्ट ग्रॉसर

(DID News) नई दिल्ली :- शराबी फ़िल्म के एक दृश्य में ज़मीन पर पड़ी खाली बोतल देखकर अमिताभ बच्चन का किरदार एक शेर बोलता है- ‘अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मयखाने में, जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में… दिवाकर राही का यह शेर अमिताभ बच्चन ने भले ही फ़िल्मी सिचुएशन में बोला हो, मगर चालू वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाही में अगर बॉक्स ऑफ़िस के नतीजों पर नज़र डालें तो हालात कुछ ऐसे ही हैं।

महामारी की दूसरी लहर ने अप्रैल-जून की पहली तिमाही में तो कोई फ़िल्म ही रिलीज़ नहीं होने दी, दूसरी तिमाही में भी 3 बॉलीवुड फ़िल्में ही सिनेमाघरों में उतर सकीं। दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने की उम्मीद में निर्माताओं ने जोख़िम उठाया, मगर कुछ महामारी का ख़ौफ़ और कुछ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की आदत ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक जाने से रोककर रखा।

महाराष्ट्र में सिनेमाघरों की बंदी ने भी हिंदी फ़िल्मों के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया। जिन राज्यों में सिनेमाघर खुले, वहां दर्शकों दर्शकों की तादाद 50 फीसदी तक सीमित कर दी गयी। इन सब फैक्टरों का असर यह रहा कि सामान्य दिनों में फ़िल्में एक ही दिन में जितनी कमाई करती थीं, वो अब उनके लाइफ़ टाइम कलेक्शंस बन गये हैं।

दूसरी तिमाही में बेलबॉटम बनी हाइएस्ट ग्रॉसर

दूसरी तिमाही में तीन बॉलीवुड और कुछ हॉलीवुड फ़िल्में सिनेमाघरों में आयी। 19 अगस्त को अक्षय कुमार की फ़िल्म बेलबॉटम सिनेमाघरों में उतरी। बॉलीवुड हंगामा वेबसाइट के अनुसार इस फ़िल्म ने लगभग 30 करोड़ का कलेक्शन किया, जो सबसे अच्छा है। 27 अगस्त को अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की फ़िल्म चेहरे सिनेमाघरों में आयी, जो करीब 3 करोड़ ही जमा कर सकी।