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धर्म

पुत्र, सौभाग्य और संपदा के लिए आज रखें कोकिला पूर्णिमा व्रत

पुत्र, सौभाग्य और संपदा के लिए आज रखें कोकिला पूर्णिमा व्रत

धर्म
 धर्म (DID NEWS):- आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कोकिला पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष कोकिला पूर्णिमा व्रत आज 23 जुलाई दिन शुक्रवार को है। इस दिन मां दुर्गा की कोयल स्वरुप में आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कोकिला पूर्णिमा व्रत के अलावा पूरे सावन माह में कोकिला व्रत रखा जाता है। कोकिला पूर्णिमा का व्रत करने से व्यक्ति को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। हिन्दी पंचांग के अनुसार, 23 जुलाई दिन शुक्रवार सुबह 10:43 बजे से आषाढ़ पूर्णिमा तिथि लग रही है। यह अगले दिन सुबह 08:06 बजे तक रहेगी। व्रत की पूर्णिमा 23 जुलाई दिन शुक्रवार को है। कोकिला पूर्णिमा का व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। मां दुर्गा की कृपा से व्यक्ति को संतान, सुख, संपदा, धन आदि सभी चीजों की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से सावन सोमवार व्रत का लाभ मिलता है। कहने का अर्थ ह...
कब है आषाढ़ पूर्णिमा? जानें शुभ मुहूर्त

कब है आषाढ़ पूर्णिमा? जानें शुभ मुहूर्त

धर्म
आषाढ़ मास की पूर्णिमा इस वर्ष 24 जुलाई दिन शनिवार को है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था और सभी पुराणों की रचना की थी। उनके महान योगदान को देखते हुए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रुप में मनाते हैं। गुरु पुर्णिमा के दिन गुरु की पूजा की जाती है। जो लोग आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, वे भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण करते हैं। आइए जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त के बारे में। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 23 जुलाई दिन शुक्रवार को दिन में 10 बजकर 43 मिनट से हो रहा है। इसका समापन 24 जुलाई को सुबह 08 बजकर 06 मिनट पर हो रहा है। उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई दिन शनिवार को है।आषाढ़ पूर्णिमा के दिन दो ...
आज है भड़ली नवमी, विवाह के लिए इस माह का अंतिम शुभ मुहूर्त

आज है भड़ली नवमी, विवाह के लिए इस माह का अंतिम शुभ मुहूर्त

धर्म
भड़ली नवमी को भड़ाल्या नवमी या कंदर्प नवमी भी कहा जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी होती है। इस वर्ष भड़ली नवमी आज 18 जुलाई दिन रविवार को है। भड़ली नवमी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। भड़ली नवमी का दिन विवाह के लिए शुभ मुहूर्त वाला होता है। जुलाई माह में यह विवाह के लिए अंतिम शुभ मुहूर्त है क्योंकि इसके बाद से देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो रहा है, जिसकी वजह से 4 माह के लिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि जैसे मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।...
कल है स्कंद षष्ठी

कल है स्कंद षष्ठी

धर्म
धर्म(DID NEWS):- हिन्दी पंचांग के अनुसार, स्कंद षष्ठी का व्रत हर मास की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस बार आषाढ़ मास की स्कंद षष्ठी का व्रत 15 जुलाई दिन गुरुवार को है। स्कंद षष्ठी के दिन भगवान शिव के बड़े पुत्र और देवताओं के सेनापति स्कंद कुमार यानी भगवान कार्तिकेय की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। स्कंद षष्ठी का व्रत मुख्यत: लोग दक्षिण भारत में रखते हैं। स्कंद षष्ठी को संतान षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को करने से संतान को सभी प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलती है। आइए जानते है स्कंद षष्ठी तिथि और पूजा के बारे में।हिन्दी पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 15 जुलाई दिन गुरुवार को प्रात: 07 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि 16 जुलाई दिन शुक्रवार को प्रात: 06 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। ऐसे में स्कंद षष्ठी का व्रत 16 जुलाई को रखा जाएगा और अगले दिन पारण क...
कोरोना के बीच कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

कोरोना के बीच कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

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धर्म (DID NEWS):- कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर के बीच कांवड़ यात्रा की अनुमति देने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट इस मामले की सुनवाई 16 जुलाई को करेगा। कांवड़ यात्रा 25 जुलाई से शुरू होने वाली है। इसमें उत्तरी राज्यों से शिव भक्त अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में चढ़ाने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी से जल इकट्ठा करने के लिए पैदल या अन्य साधनों से यात्रा करते हैं। उत्तराखंड सरकार की तरफ से इस साल कांवड़ यात्रा रद्द करने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने इसे जारी रखने का फैसला किया है। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरियंट की पुष्टि होने और संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर कांवड़ यात्रा क...
कोरोना काल में कैसे निकाली जाएगी भगवान जगन्नाथ की पुरी रथ यात्रा

कोरोना काल में कैसे निकाली जाएगी भगवान जगन्नाथ की पुरी रथ यात्रा

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धर्म (DID NEWS):-  भगवान जगन्नाथ की पुरी रथ यात्रा  कल यानी कि 12 जुलाई, सोमवार की सुबह निकाली जाएगी, उड़ीसा का जगन्नाथ पुरी धाम भारत में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में प्रसिद्ध है. खासतौर से इस धाम में हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने व उनकी इस लोकप्रिय रथयात्रा का हिस्सा बनने आते हैं. माना जाता है कि यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का विशाल रथ खींचना, उनके भक्तों को सौभाग्य देता है. लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण, इस बार ये यात्रा सूक्ष्म रूप से निकाली जाएगी. हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही भव्य उत्साह के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा निकाले जाने का विधान है. इस वर्ष 2021 में यह पावन यात्रा 12 जुलाई, सोमवार से आरंभ होगी और इसका समापन 20 जुलाई, मंगलवार को देवशयनी एकादशी के पर्व के साथ ही पूरे विधि-विधान अनुसार ...
कब है देवशयनी एकादशी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय एवं महत्व

कब है देवशयनी एकादशी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय एवं महत्व

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धर्म (DID NEWS):- देवशयनी एकादशी को आषाढ़ मास की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। इस दिन से चतुर्मासा का प्रारंभ होता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहते है। इसे पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी या हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवता योग निद्रा में चले जाते हैं। इस सृष्टि के संचालक भगवान शिव होते हैं। चतुर्मास के समय में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा होती है। चार मास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है। देवउठनी एकादशी को जब भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आते हैं, तब मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। जागरण अध्यात्म में जानते हैं कि इस वर्ष देवशयनी एकादशी कब है, उसकी तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय एवं महत्व क्या है?हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आष...
डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण दवा है तुलसी

डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण दवा है तुलसी

धर्म
सनातन धर्म में तुलसी का विशेष महत्व है। हर घर में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है। आयुर्वेद में तुलसी को औषधि माना जाता है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो कई रोगों में लाभकारी होते हैं। डॉक्टर्स भी बदलते मौसम में होने वाले मौसमी बुखार, सर्दी-खांसी और जुकाम में तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों की मानें तुलसी के पत्तों का सेवन करने से बढ़ते वजन और शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं, तो तुलसी के पत्तों का सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से शुगर कंट्रोल में रहता है। कुछ शोधों में खुलासा हो चुका है कि तुलसी के पत्तों में एंटी-डायबिटिक के गुण पाए जाते हैं। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं- पर छपी एक शोध में तुलसी के पत्तों के फायदे को बताया गया है। इस शोध की मानें तो डायबिटीज के मरीजों के लिए तुलसी रामबाण ...
इस दिन शुरु होगा भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण

इस दिन शुरु होगा भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण

धर्म
धर्म (DID NEWS):-हिंदी पचांग का पांचवा महीना श्रावण है, जिसे सावन नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में सावन माह को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। सावन माह देवो के देव भगवान शिव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अराधना की जाती है। सावन माह के प्रत्येक सोमवार को शिव की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। शिव भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस महीने का इंतजार करते हैं। इस माह के प्रत्येक सोमवार को पूजा करने का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। शिव को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं सोलह सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं। इसी माह में शिव भक्त कांवड की यात्रा आयोजित करते हैं। पचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के बाद श्रावण माह की शुरुआत होती है। 24 जुलाई के दिन आषाढ़ माह समाप्त हो रहा है और 25 जुलाई से सावन माह की शुरुआत होगी। श्रावण माह 25 जुलाई से 22 अगस्त तक चलेगा।...
7 जुलाई को है बुध प्रदोष व्रत

7 जुलाई को है बुध प्रदोष व्रत

धर्म
धर्म (DID NEWS):- एकादशी व्रत की तरह ही प्रदोष व्रत भी प्रत्येक मास में दो बार आते हैं। हर मास की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। दिन के आधार पर इनका नाम बदलता रहता है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 07 जुलाई को है। ऐसे में इस माह का प्रदोष व्रत बुधवार को है। इस प्रकार से बुध प्रदोष व्रत 07 जुलाई को है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती विधि विधान से पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि बुध प्रदोष के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और प्रदोष व्रत का क्या लाभ होता है।हिन्दी पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 06 जुलाई दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 02 मिनट से हो रहा है। त्रयोदशी तिथि 08 जुलाई को गुरुवार तड़के 03 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष काल का मुहूर्त 07 जुलाई को प्राप्त हो रहा है, इसलिए बुध प्...