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दिल्ली में रहने वाले करोड़ों लोगों को किस महकमे से है सबसे अधिक शिकायतें

क्षेत्रीय समाचार (DID NEWS):- राजधानी के लोगों को सबसे अधिक शिकायतें दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से हैं। इसमें भी गंदे पानी की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या है। यह दावा प्रजा फाउंडेशन द्वारा ‘दिल्ली में नागरिक मुद्दों की स्थिति’ संबंधी रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली वालों की कुल शिकायतों में 47 फीसद दिल्ली जल बोर्ड की हैं, यानी हर पांच में से तीन शिकायतें पेयजल से जुड़ी हैं। इसमें भी 27 फीसद शिकायतें गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर की जा रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न सरकारी एजेंसियों को 2020 में कुल तीन लाख 36 हजार 868 शिकायतें अलग-अलग माध्यमों से मिली हैं। इसमें अकेले दो लाख 27 हजार 973 शिकायतें डीजेबी से संबंधित थीं। इनमें भी एक लाख 45 हजार 316 शिकायतों को डीजेबी द्वारा ‘अन्य’ में वर्गीकृत किया गया। इन शिकायतों का न तो निराकरण किया गया और न ही संबंधित विभागों को भेजा गया। डीजेबी में कार्रवाई रिपोर्ट और शिकायतों के निवारण की जानकारी देने का ठोस तंत्र भी नहीं है।प्रजा फाउंडेशन की ट्रस्टी निताई मेहता का दावा है कि 2020 में डीजेबी को प्राप्त कुल शिकायतों में से 47 फीसद ‘पानी की कमी’ और ‘पानी की आपूर्ति नहीं होने’ से संबंधित थीं। वहीं, 38 हजार 663 शिकायतें गंदे पानी की आपूर्ति से संबंधित थीं।

गंदे पानी का स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर दिल्ली में गंदे पानी की समस्या कभी खत्म न होने वाला मुद्दा है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में टाइफाइड के 20 हजार 370 मामले और दस्त दो लाख 39 हजार 575 मामले सामने आए थे।इसमें बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की वजह दूषित पानी था। यही नहीं, महामारी के दौरान पानी और साफ जैसी मूलभूत नागरिक सेवाओं के प्रति केंद्र सरकार, स्थानीय निकाय और राज्य सरकार द्वारा ध्यान भी नहीं दिया गया। दिल्ली में ये है व्यावहारिक दिक्कत शिकायतों के निराकरण में होने वाली परेशानी को लेकर दिल्ली के साथ व्यावहारिक दिक्कत यह है कि यहां एक साथ एक ही स्थान पर कई एजेंसियां काम करती हैं। उनके क्षेत्राधिकार को लेकर लोगों में काफी भ्रम है।

इसके बाद भी दूसरे विभाग से संबंधित शिकायतों को साझा करने की कोई परस्पर और आसान व्यवस्था नहीं है। इसके चलते नागरिकों की न तो शिकायतें सुनी जाती हैं और न ही लंबे समय तक समस्याएं दूर होती है।नगर निगम के सार्वजनिक शौचालय की सुविधा में भी गंभीर असमानता देखी गईं। तीन में से केवल एक सार्वजनिक शौचालय महिलाओं के लिए है। यही नहीं 10 शौचालय में से एक का पाइप न सीवरेज से जुड़ा है और न ही उसमे बिजली है। इसी तरह 16 फीसद शौचालय में पानी का कनेक्शन नहीं है। फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के ने कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को रेखांकित करते हुए बताया कि दिल्ली का 48 फीसद कचरा बिना गीला-सूखा अलग किए लैंडफिल साइट पर पहुंच रहा है। नगर निगम के 272 वार्डो में से केवल 82 वार्ड में ही 80-100 फीसद तक अपशिष्ट अलग होते हैं।