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दिल्ली के प्रदूषण को थामना नामुमकिन है

नई दिल्ली (DID News) :- दिल्ली-एनसीआर में जहां एक ओर ठंड बढ़ी है तो इसके साथ-साथ प्रदूषण में भी इजाफा होने लगा है। हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। इसमें हैरत की बात यह कि दिल्ली से ज्यादा एनसीआर के शहरों में प्रदूषण देखने को मिल रहा है। बावजूद इसके दिल्ली पर तो सभी का फोकस है, जबकि एनसीआर पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का नियमित रूप से जारी होने वाला एयर क्वालिटी बुलेटिन भी इस तथ्य की तस्दीक करता है। विशेषज्ञों की मानें तो जब तक एनसीआर में भी समान नियम कायदे लागू नहीं होंगे, दिल्ली के प्रदूषण को थामना नामुमकिन है। दिल्ली सरकार भी केंद्र सरकार से इसे लेकर अनुरोध कर चुकी है।

एनसीआर के कई शहरों में अक्टूबर की शुरुआत में ही हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी थी, लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं था। दिल्ली में 16 अक्टूबर को इस सीजन में पहली बार एयर इंडेक्स खराब श्रेणी में गया, जबकि एनसीआर के बल्लभगढ में सात अक्टूबर को ही एयर इंडेक्स खराब (221) हो गया। इस दिन दिल्ली का एयर इंडेक्स 127 और फरीदाबाद का 236 था। आठ को भिवाड़ी का एयर इंडेक्स भी 242 यानी खराब श्रेणी में पहुंच गया। एनसीआर के अन्य क्षेत्रों जैसे बुलंदशहर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में नौ अक्टूबर से एयर इंडेक्स खराब होने लगा, जबकि दिल्ली में 15 तारीख तक मध्यम ही बना रहा। अब अगर माह के दूसरे पखवाड़े की बात करें तो दिल्ली में 16, 17 और 20 अक्टूबर को एयर इंडेक्स खराब श्रेणी में रहा। जबकि इसी दौरान ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, करनाल, नोएडा व भिवाड़ी का एयर इंडेक्स 300 से ऊपर यानी बहुत खराब श्रेणी में जा पहुंचा। गाजियाबाद में हवा की गुणवत्ता 16 से 24 अक्टूबर के दौरान खराब या बहुत खराब श्रेणी में रही है।

उधर, 21-24 अक्टूबर के दौरान दिल्ली का इंडेक्स मध्यम श्रेणी में रहा जबकि पानीपत और सोनीपत का 21 को खराब हो गया। पानीपत का इंडेक्स 22 को खराब रहा और सोनीपत में 23 एवं 24 को खराब दर्ज किया गया। इसके बाद एक दो दिन बारिश का असर रहा, लेकिन बुधवार से फिर एयर इंडेक्स खराब श्रेणी में पहुंच गया।

सीएसई ने भी स्वीकारा यह तथ्य

सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दिल्ली का शीतकालीन पीएम 2.5 औसतन 192 (15 अक्टूबर, 2020 से 15 फरवरी, 2021) था। जबकि एनसीआर के गाजियाबाद में यह आंकड़ा 229, ग्रेटर नोएडा में 204, नोएडा में 203 और बुलंदशहर में 198 था।