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19 नवंबर को लगने जा रहा साल का अंतिम चंद्रग्रहण, रखनी होंगी ये सावधानियां

धर्म (DID News) :- 19 नवंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारतीय समय अनुसार सुबह करीब 11 बजकर 30 बजे लगेगा और शाम पांच बजकर 33 मिनट बजे खत्म होगा. यह ग्रहण कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर वृष राशि, कृतिका नक्षत्र में लगेगा. कृतिका नक्षत्र सूर्य देव का नक्षत्र है और वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं, इसके चलते इस ग्रहण का असर चंद्रमा, सूर्य और शुक्र ग्रह से संबंधित लोगों पर विशेष तौर पर पड़ेगा. चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण होगा, इसलिए ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा फिर भी कई राशियां भी प्रभावित होंगी.

 

पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ पल के लिए दिखेगा ग्रहण
चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखकर सिर्फ पूर्वोतर राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश में कुछ पल के लिए दिख सकता है अलबत्ता अमेरिका, आस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया और उत्तरी यूरोप में यह पूर्ण ग्रहण के तौर पर नजर आएगा. इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को लगा था और दूसरा, अंतिम चंद्रग्रहण 19 नवंबर को होगा. ज्योतिष गणना अनुसार शुक्र वृष राशि से अष्टम भाव में गतिमान होंगे. नवम भाव में शनि देव और देव गुरु बृहस्पति की युति हो रही होगी. छठे भाव में मंगल भी बुध के साथ योग बना रहे होंगे. ग्रहण के दौरान वृष राशि वालों को खास ध्यान देना होगा. राहु पहले से ही वृष राशि में गोचर कर रहा है कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए ये ग्रहण मिले-जुले फल देगा.

 

चंद्रग्रहण के दौरान ध्यान रखने वाली कुछ अहम बातें
– ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं घर पर ही रहें.
– ग्रहण में चंद्रमा को न देखें. इससे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
– नोकदार चीजें जैसे चाकू, कैंची, सूई आदि का उपयोग न करें.
– ग्रहण के दौरान कुछ भी नहीं खाए, सिलाई भी वर्जित है.
– मुंह में तुलसी रखकर हनुमान चालीसा का पाठ करें.
– ग्रहण समाप्त होने पर शुद्ध जल से स्नान करें.
– मान्यता है कि ग्रहण के दौरान चांद का गुरुत्वाकर्षण बहुत अधिक रहता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण नहीं देखना चाहिए.
– ग्रहण के समय महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं. उन्हें बेचैनी, पसीना और कमजोरी हो सकती हैं.
– ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं एक नारियल अपने पास रखें. इससे ग्रहण का बुरा असर नहीं पड़ता. ग्रहण काल में जप, ध्यानादि करती रहें. ईष्ट देव के मंत्रों का मन ही मन जाप करना चाहिए.